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हौंसला

वो आने वाली किलकारी की आवाज़ें राज के ज़हन में जाने कब से गूंज रही थी, वो एक पल का इंतज़ार था कि मानो सदियाँ निकल गयी हो कि जिस दिन उसे कोई आ कर कहेगा कि तुम पापा बन गए हो ,राज को न जाने क्यों ऐसा लगता था  कि जल्दी से वो सपना पूरा हो और एक मेहमान जिसका इंतज़ार राज और स्मिता कर रहे है वो बस आ जाये, आखिर वो इंतज़ार की घड़ियां खत्म हुई और तय वक़्त पर मेहमान ने एक नन्ही परी  के रूप में प्रवेश लिया, राज और स्मिता के लिए तो जैसे सारा जहां एक चेहरे में समा गया हो, वो  चेहरा जिसका इंतज़ार वो जाने कितनी रातों से कर रहे थे, चूंकि उनके जीवन मैं वो ख़ुशी नवरात्र के दिनों मैं आयी थी इसीलिए दोनों ने अपने उसका नाम वैष्णवी रखा था  समय बीता,  धीरे धीरे राज और स्मिता भी अपनी जिंदगी मैं लौटने लगे थे  क्योंकि हर संतान की शुरुवाती परवरिश जिम्मेदार माता पिता के समर्पण  और जिम्मेदारियां के सही निर्वहन पर आधारित होती है  और इसी के  कारण   जीवन थोड़ा अस्त व्यस्त हो जाता है ,एक दिन राज को कुछ आभास हुआ की वैष्णवी की आँखें एक जगह नहीं टिकती हैं और उसने स्मिता को इस बारे...